मेरा गांव जैसे अम्मां के आंचल की छांव
सन् 1976 का रामगढ़ गांव, अम्मां का स्नेह, मिट्टी की खुशबू, लालटेन की रोशनी, चूड़ियों की छन-छन, दशहरे का मेला और बचपन की बेफिक्र दुनिया. यह संस्मरण उस समय की याद दिलाता है जब गांव सिर्फ रहने की जगह नहीं, बल्कि रिश्तों, संस्कारों और अपनापन से भरी पूरी दुनिया हुआ करता था.
