रेगिस्तान में दूर क्षितिज की ओर देखती एक उदास महिला, आसमान में उमड़ते काले बादल

मृगतृष्णा

‘मृगतृष्णा कविता’ जीवन की उस अंतहीन प्यास और टूटती उम्मीदों की कहानी है, जहाँ रेगिस्तान केवल बाहर नहीं, भीतर भी फैला होता है। यह कविता दर्द, अकेलेपन और एक नई शुरुआत की आस को संवेदनशील शब्दों में व्यक्त करती है।

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