भारतीय ट्रांसजेंडर व्यक्ति आत्मविश्वास के साथ खड़ा, पृष्ठभूमि में संविधान की प्रतीकात्मक छवि

मैं भी मनुष्य हूँ…

“मैं भी मनुष्य हूँ” कविता तीसरे लिंग के अस्तित्व, सम्मान और अधिकारों की सशक्त अभिव्यक्ति है। यह रचना समाज से स्वीकार्यता और समानता की मांग करते हुए मानवीय संवेदनाओं को गहराई से उजागर करती है।

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