खुशी खुशी कर दो विदा…
आज जब उसकी विदाई का समय आया , तो कैसे समझाऊं अपने मन को…. उसके बिना… जीने की आदत जो नहीं है….
दुनिया की रस्म है…. निभानी तो पड़ेगी ।

आज जब उसकी विदाई का समय आया , तो कैसे समझाऊं अपने मन को…. उसके बिना… जीने की आदत जो नहीं है….
दुनिया की रस्म है…. निभानी तो पड़ेगी ।