gulmohar
अकेली वृद्ध माँ बैठी हुई, आँखों में आँसू और मन में पीड़ा, सामाजिक उपेक्षा का प्रतीक

क्यों वृद्धाश्रम में जाऊँ

यह कविता उस माँ की पीड़ा को स्वर देती है, जिसने जीवन भर अपनी संतान को सींचा, सँवारा और बड़ा किया, लेकिन अंत में उसी से वृद्धाश्रम जाने का आदेश मिला। यह रचना समाज से एक करुण सवाल पूछती है क्या माँ का अब कोई ठौर नहीं?

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