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अपनी बेटी का हाथ थामे आत्मविश्वास से आगे बढ़ती माँ, नए शहर की पृष्ठभूमि में उगता सूरज

मुक्ति की उड़ान…

“मुक्ति की उड़ान” एक सशक्त कहानी है जो दर्शाती है कि जब एक माँ अपने आत्मसम्मान और बेटी के भविष्य के लिए खड़ी होती है, तो वह समाज की हर रूढ़ि को तोड़ सकती है। यह कहानी नारी साहस, शिक्षा और आत्मनिर्भरता की प्रेरक मिसाल है।

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माँ का पीतल का संदूक

माँ का पीतल का संदूक—छोटा, पर सोने-सा चमकता। उसमें सहेजे गए गहने, सिक्के, पान और यादें पीढ़ियों की परंपरा और स्नेह का दीप हैं। बचपन से मुझे खींचने वाला यह संदूक अब मेरी नई यादों और ज्वेलरी का घर बन गया है।

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“यादों का लिफाफा”

इस कविता में एक संतान अपनी माँ की यादों और सीख को भावनात्मक रूप में संजोती है। माँ द्वारा दिए गए एक पुराने खत में छिपे भाव उसे आज भी संबल देते हैं। माँ की कही बातें, उसके एहसास, और उसका साथ — सब कुछ आज भी दिल की अलमारी में सजे हुए हैं। वह मानती है कि वह माँ जैसी नहीं बन सकी, लेकिन माँ से जीवन की सच्ची बातें सीखी हैं — मोहब्बत, यारी और कठिनाइयों में टूटे बिना जीना। उजालों की प्रतीक्षा में अंधेरों से जो उसने पाया, वो भी माँ की दी हुई रोशनी से ही संभव हो पाया।

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