महाकाल लोक में फोगिंग से राहत, गर्मी में भक्तों को ठंडक
उज्जैन के महाकाल लोक में गर्मी से राहत देने के लिए पहली बार फोगिंग सिस्टम शुरू किया गया है। 900 मीटर पैदल मार्ग पर किए गए इस डेमो से श्रद्धालुओं को ठंडी फुहारों का अनुभव मिल रहा है।

उज्जैन के महाकाल लोक में गर्मी से राहत देने के लिए पहली बार फोगिंग सिस्टम शुरू किया गया है। 900 मीटर पैदल मार्ग पर किए गए इस डेमो से श्रद्धालुओं को ठंडी फुहारों का अनुभव मिल रहा है।
नागपंचमी के पावन अवसर पर श्री महाकालेश्वर मंदिर के शिखर पर स्थित भगवान नागचंद्रेश्वर मंदिर के पट सोमवार रात 12 बजे खोले गए। यह मंदिर वर्ष में केवल एक बार, नागपंचमी के दिन दर्शनार्थियों के लिए खोला जाता है। मंगलवार की दोपहर तक ही 3 लाख से अधिक श्रद्धालु दर्शन कर चुके थे, और प्रशासन को अनुमान है कि रात 12 बजे तक यह संख्या 10 लाख को पार कर जाएगी।
उज्जैन को उज्जयिनी नाम से फिर पहचान दिलाने का प्रयास चल रहा है — एक ऐसी नगरी जो विक्रमादित्य की राजधानी रही, कालिदास और भर्तृहरि की कर्मभूमि रही और जिसे साहित्य, ज्योतिष, संस्कृति और खगोल-विज्ञान की जन्मस्थली माना गया। पंडित सूर्य नारायण व्यास ने विक्रमादित्य की विरासत और उज्जयिनी के गौरव को पुनर्स्थापित करने में महती भूमिका निभाई। आज उज्जैन धार्मिक पर्यटन का केंद्र तो बन गया है, लेकिन उस उज्जयिनी का साहित्यिक, सांस्कृतिक वैभव खोता जा रहा है। अब समय है कि उज्जयिनी को उसका प्राचीन गौरव फिर से मिले — नाम से, संवत् से और सांस्कृतिक पहचान से।