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संदेह और संबंध…

संदेह हर बार अविश्वास से नहीं, बल्कि संवाद की कमी से जन्म लेता है। जब शब्द थक जाते हैं और मौन लंबा हो जाता है, तब मन कल्पनाओं से भर जाता है। पर यदि हम सच से संवाद करें, तो संदेह भी संबंध को सुधारने का अवसर बन सकता है। क्योंकि प्रेम का अर्थ अंधविश्वास नहीं, बल्कि समझ और सच्चाई में विश्वास है।

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“मिलन और बिछोह

**Excerpt:**

कुछ लोग ज़िंदगी में ऐसे मिलते हैं जैसे उनका मिलना तय था — न पहले, न बाद में। वे आते हैं, अपना किरदार निभाते हैं और चले जाते हैं, जैसे कभी थे ही नहीं। पीछे रह जाती हैं उनकी यादें, फोन में उनका नंबर, कुछ जगहें जो अब भी उनकी मौजूदगी की खुशबू से भरी हैं। मिलना जितना सुख देता है, बिछड़ना उतना ही गहरा दर्द छोड़ जाता है।

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