क्या मर्द कभी रोते हैं?

“नहीं, कभी नहीं।”“कभी नहीं?”“नहीं, कभी नहीं।”“सच में, कभी नहीं?”“हाँ, सच में कभी नहीं रोते।” हाँ, सच में मर्द कभी नहीं रोते… कहते-कहते आँखों से आँसू छलक पड़े, और उन छलकते हुए आँसुओं में रवानी कब आ गई, पता ही नहीं चला… मुझे नहीं पता कि मर्द पहली बार कब रोया!क्या जब खुदा ने आदम को…

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शब्द मेरे भाव मेरे

निरुपमा सिंह, बिजनौर उमड़ते भावों कोशब्दों में उकेरनान जाने यह शौक !कब और कैसे पनप गयानन्हा पौधा था जोअब वृक्ष बन गयाकुछ तो बचपन से ही थाप्रकृति का सान्निध्य मिलास्वयं ही हरा-भरा हो गयापानी के स्पर्श मात्र से हीखूब फल-फूल गयाउर्वरा के सान्निध्य मेंदोगुना हो गयामानों इच्छाओं कोखुला आकाश मिल गया। Post Views: 374

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