Live Wire News literary portal with Gulmohar and Rajnigandha flowers

यादें

मन जब अतीत की ओर लौटता है तो उसे उन अधूरी इच्छाओं और अधूरे पलों का बोध होता है, जो समय की सीमाओं में बँधकर कभी साकार न हो सके। प्रेम के वे भाव, जो पूरी तरह व्यक्त होने से पहले ही ठहर गए—जैसे बादल तो आए, मन के आकाश में छा गए, पर बरसने से पहले ही थम गए। उन भावों की सुगंध, उन इच्छाओं की मासूमियत आज भी भीतर कहीं जीवित है, पर वे कभी वास्तविकता का रूप न ले सकीं।
इन्हीं स्मृतियों में यह सत्य भी उजागर होता है कि जीवन में सब कुछ पूर्ण नहीं होता। कुछ बहारें अधूरी रह जाती हैं, कुछ ऋतुएँ बिना खिले ही ढल जाती हैं। प्रेम की गहराई भी कई बार अपने संपूर्ण रूप तक नहीं पहुँच पाती। यह अधूरापन ही जीवन का हिस्सा है.

Read More

अधूरे ख़्वाबों का सफ़र

दिल एक स्थायी ठिकाना नहीं है, यह किसी मुसाफ़िर का डेरा है। कभी यह ठहर जाता है, तो कभी अचानक कहीं और निकल पड़ता है। इसमें रुकने का कोई नियम नहीं है—यह क्षणिक है, चंचल है। इंसान सोचता है कि दिल अब सुकून पाएगा, किन्हीं भावनाओं में ठहर जाएगा, मगर अगले ही पल यह फिर चल पड़ता है, नई राहों की तलाश में। जैसे कोई मुसाफ़िर यात्रा के बीच कहीं विश्राम करता है और फिर सुबह होते ही अगले पड़ाव की ओर निकल जाता है, वैसे ही दिल भी है—कभी आता है, कभी ठहरता है और फिर चुपचाप आगे बढ़ जाता है।

Read More

धूप आती है….

सांझ ढलते ही मन बोझिल हो उठता है। लौटते परिंदों की फुर्ती और घोंसले तक पहुँचने की चाह सिखाती है कि ठिकाना ही असली सुकून है। लेकिन यह सांझ अब न गले लगाती है, न मुस्कान भरती है—बस तन चलता रहता है और मन सूखे पत्तों-सा झरता है। खाने की मेज़ पर अब बर्तनों का कोई राग नहीं, न ही निवालों की कोई चिरौरी। पेट भरना भी बस एक कवायद रह गया है। फिर भी गलियारों से आती धूप पतझड़ से मन को बसंत की ओर ताकने पर मजबूर कर देती है। आँखों से बहता नमकीन पानी चुपचाप तकिए में समा जाता है। सुबह आती है, थकी-हारी, पर वही रोज़मर्रा की भागदौड़ मन को थोड़ी राहत देती है। दिन के उजाले में नए चेहरे और कहानियाँ मिलती हैं, और धीरे-धीरे सांझ से रात तक का मलाल भी उतरने लगता है।

Read More

ज़िंदगी कुछ इस तरह…

वो शाम, वो शहर, वो गुलाब, वो चाय — सब कुछ जो मेरा था, किसी और का हो गया। मेरी हर पसंद, हर भावना, हर छुअन की कल्पना… कोई चुपचाप अपने साथ ले गया। यह कविता नहीं, मेरी बिखरी हुई ज़िंदगी की दास्तान है।

Read More