प्रयागराज-सा संगम मन

कुछ भावनाएँ ऐसी होती हैं जो कही नहीं जातीं, लेकिन दिल की गहराइयों में अनवरत बहती रहती हैं — सिसकती हुई, दबी हुई, फिर भी महसूस होती हुई। ये धड़कनों में छिपे वो एहसास हैं जो न पूरी तरह अव्यक्त हैं, न पूरी तरह अभिव्यक्त। दिल मानो एक ऐसा प्रयाग है जहाँ हर भावना, हर याद, हर संबंध एकत्र हो जाता है — जैसे गंगा, यमुना और सरस्वती का संगम।हाल ही में जन्मे एक मासूम से इश्क़ ने मन को कुंभ की तरह भीगो दिया है — वह भी मौन में, तप में, जल में और हवा के हर स्पर्श में। तेरी उपस्थिति जैसे हर तत्व में घुल गई है। इस भावनात्मक संगम में अब प्रेम और भक्ति एकसाथ बह रहे हैं। मन जैसे प्रयागराज बनकर इंद्रियों में शंखनाद कर रहा है — बुला रहा है, कि अब इस प्रवाह में तुम भी आ जाओ।

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devotees walking in padyatra with drums and chants heading to Sanwariya Seth temple with flowers and devotion

सेठ नहीं साक्षात श्याम हैं सांवरिया

जय सांवरिया सेठ के जयकारों के बीच मंगलवार को संतोष विश्वकर्मा के नेतृत्व में 60 श्रद्धालुओं का जत्था श्री सांवरिया सेठ मंदिर, मंडपिया (राजस्थान) के लिए रवाना हुआ। नगरवासियों ने पुष्पवर्षा कर विदाई दी, और भक्तों ने कहा— यह यात्रा नहीं, आत्मा की पुकार है।

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