बालकनी
बालकनी केवल घर का हिस्सा नहीं, मन का खुला आकाश है। यह वह स्थान है जहाँ विचारों को उड़ान मिलती है, सपनों को पंख लगते हैं और जीवन की छोटी-बड़ी हलचलें दिखाई देती हैं। कभी नन्ही चिड़िया यहाँ समय बिताती है, तो कभी गिलहरी अपने करतब दिखाती है। महिलाएँ सजती हैं, युवा मोबाइल में खो जाते हैं, बुज़ुर्ग यादों के किस्से सुनाते हैं और बच्चे दुनिया को समझते हैं। यही जगह आँसू छुपाने, उदासी मिटाने और क्रोध शांत करने का भी सहारा बनती है। अंत में एक कप कॉफी संग मुस्कुराहट लौट आती है।
