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जब सवाल कपड़ों का नहीं, मानसिकता का हो

भारत में बलात्कार की घटनाएँ हर उम्र और वर्ग को प्रभावित कर रही हैं छोटी बच्चियाँ, किशोर, महिलाएँ और यहाँ तक कि पुरुष भी शिकार बन रहे हैं। यह केवल शरीर का नहीं, मानसिकता का अपराध है। समाधान क़ानून के साथ-साथ शिक्षा, संवेदनशीलता और समाजिक चेतना में निहित है।

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महिलाओं, बच्चों और बुजुर्गों पर अत्याचार बढ़े

यह लेख भारतीय समाज में महिलाओं, बच्चों, बुजुर्गों और जनजाति समुदायों के खिलाफ बढ़ते अपराधों पर केंद्रित है। एनसीआरबी के 2023 के आंकड़े बताते हैं कि महिलाओं के खिलाफ अपराधों में लगातार वृद्धि हुई है, जिसमें घरेलू हिंसा, दहेज हत्याएं, अपहरण, बलात्कार और छेड़छाड़ के मामले प्रमुख हैं। बच्चों पर अत्याचारों में भी तेज़ी से वृद्धि हुई है, और बुजुर्ग व जनजाति समुदाय भी सुरक्षित नहीं हैं। लेख में यह भी बताया गया है कि केवल कानून और पुलिस की तत्परता ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि समाज में पुरुष प्रधान मानसिकता को बदलना और महिलाओं व बच्चों की सुरक्षा के प्रति संवेदनशीलता बढ़ाना अनिवार्य है। यह स्थिति संकेत देती है कि सामाजिक और मानसिक स्तर पर व्यापक सुधार की आवश्यकता है।

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