अधूरी मुलाक़ात
42 वर्षों बाद बचपन की सहेली से मिलने पहुँची एक महिला अपने साथ ढेरों यादें लेकर आई थी, लेकिन दरवाज़े पर मिला एक सच उसकी पूरी दुनिया को स्तब्ध कर गया। दोस्ती, स्मृतियों और बिछड़न की यह मार्मिक लघुकथा दिल को छू जाती है।

42 वर्षों बाद बचपन की सहेली से मिलने पहुँची एक महिला अपने साथ ढेरों यादें लेकर आई थी, लेकिन दरवाज़े पर मिला एक सच उसकी पूरी दुनिया को स्तब्ध कर गया। दोस्ती, स्मृतियों और बिछड़न की यह मार्मिक लघुकथा दिल को छू जाती है।
यह संस्मरण बचपन की उन सुनहरी यादों को जीवंत करता है, जहाँ बहन और सहेली का रिश्ता जीवनभर की सबसे बड़ी पूँजी बन जाता है। स्कूल, खेल, संयुक्त परिवार और निस्वार्थ मित्रता की यह कहानी हर पाठक को अपने बचपन की याद दिलाएगी।