नई शुरुआत

यह कविता हमें याद दिलाती है कि पराजय को भूलकर स्वयं पर विश्वास करना और पुनः शुरुआत करना आवश्यक है। आने वाला कल बेहतर होगा, और प्रसन्नता, धैर्य, हौसला और सतत प्रयास हमें निराशा से आगे बढ़ने में मदद करेंगे। अपने लक्ष्य पर ध्यान केंद्रित करके, अच्छे कर्म करते हुए हम सफलता और खुशियों की राह प्रशस्त कर सकते हैं।

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हरा-भरा पेड़ जिसकी शाखाओं पर पक्षी बसेरा किए हुए हैं

मैं प्रकृति हूँ

“प्रकृति स्वयं कहती है—मैं ही इस धरती की शोभा हूँ, जीवन का मूल आधार हूँ। मेरी कोमल शाखाएँ, मेरी छाया, मेरे फूल-पत्ते सभी जीवों के लिए आश्रय और सहारा हैं। जब कोई निराश होता है, मैं उसे आशा देती हूँ; जब कोई भूखा-प्यासा होता है, मैं उसकी भूख-प्यास मिटाती हूँ।

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