ग्रामीण आंगन में एक विरहिणी स्त्री दीपक के पास बैठी प्रेम पत्र लिखवा रही है, पास में संदेशवाहक खड़ा है और आसमान में चाँद चमक रहा है।

लिख दे कासिद लिख दे

लिख दे कासिद लिख दे इक खत’ प्रेम, विरह और समर्पण की मधुर अभिव्यक्ति है। इसमें एक विरहिणी नायिका अपने प्रियतम तक मन की व्यथा, प्रेम की स्मृतियाँ और जीवन की अधूरी अनुभूतियाँ पहुँचाने की विनती करती है।

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