मेरे साजन हैं उस पार…
कुछ दूरियाँ इतनी छोटी होती हैं कि उन्हें हथेलियों से मापा जा सकता है, लेकिन कुछ दूरियाँ उम्र भर समाप्त नहीं होतीं। ‘मेरे साजन हैं उस पार…’ अनकहे प्रेम, बिछोह, यादों और मन में रह गए अधूरे इंतज़ार की मार्मिक अभिव्यक्ति है।

कुछ दूरियाँ इतनी छोटी होती हैं कि उन्हें हथेलियों से मापा जा सकता है, लेकिन कुछ दूरियाँ उम्र भर समाप्त नहीं होतीं। ‘मेरे साजन हैं उस पार…’ अनकहे प्रेम, बिछोह, यादों और मन में रह गए अधूरे इंतज़ार की मार्मिक अभिव्यक्ति है।
रजनीगंधा की भीनी-भीनी खुशबू की तरह कुछ प्रेम दिल में हमेशा महकते रहते हैं। यह छोटी-सी कविता मिलन की खुशी, विरह की कसक और हर बिछड़न के बाद फिर से खिल उठने वाले प्रेम का एहसास कराती है।
जीवन की भागदौड़ में कुछ रिश्ते पीछे छूट जाते हैं, लेकिन उनकी यादें हमारे भीतर कहीं ठहर जाती हैं. यह कविता उन्हीं शांत पलों की कहानी है, जब आसमान, सितारे और शाम की खुशबू किसी अपने की याद दिला जाती है.
सावन की हर बूंद बीते प्रेम की यादों को फिर से जगा देती है। ‘मन का सावन’ विरह, प्रतीक्षा और मिलन की अधूरी चाहत को बारिश के रूपक में पिरोती भावपूर्ण कविता है।
यह कविता कृष्ण और राधा के अधूरे मिलन और आधे गीत की पीड़ा को व्यक्त करती है। कवि अपने मन में बंसी की तान सुनते हुए राधा जैसा जीवन जीने की चाहत व्यक्त करता है। अधूरी आकांक्षाएँ, जंजीरों को तोड़कर आज़ादी पाने की तड़प, और पुनर्जन्म में फिर से कृष्ण को देखने की प्रार्थना कविता के भावों को गहरा और मार्मिक बनाती है। यह कविता प्रेम, विरह और आधे जीवन की अधूरी तृप्ति को दर्शाती है।