प्रकृति का कहर
प्रकृति जब विकराल रूप धारण करती है तो इंसान ही नहीं, पशु-पक्षी और जीव-जंतु भी संकट में पड़ जाते हैं. यह कविता प्रकृति के साथ किए जा रहे खिलवाड़ और पर्यावरण संतुलन की आवश्यकता पर सवाल उठाती है.

प्रकृति जब विकराल रूप धारण करती है तो इंसान ही नहीं, पशु-पक्षी और जीव-जंतु भी संकट में पड़ जाते हैं. यह कविता प्रकृति के साथ किए जा रहे खिलवाड़ और पर्यावरण संतुलन की आवश्यकता पर सवाल उठाती है.