gulmohar
बाढ़ के बीच प्रकृति के विकराल रूप को दर्शाती हिंदी कविता

प्रकृति का कहर

प्रकृति जब विकराल रूप धारण करती है तो इंसान ही नहीं, पशु-पक्षी और जीव-जंतु भी संकट में पड़ जाते हैं. यह कविता प्रकृति के साथ किए जा रहे खिलवाड़ और पर्यावरण संतुलन की आवश्यकता पर सवाल उठाती है.

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