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रावण दहन

यह लेख रावण दहन की पौराणिक कथा को जीवंत और संवादात्मक अंदाज़ में प्रस्तुत करता है। इसमें बताया गया है कि रावण केवल एक राक्षस नहीं बल्कि विद्वान और शिवभक्त था, पर अहंकार और लालच के कारण उसका संहार निश्चित था। लंका युद्ध के समय देवी दुर्गा की पूजा और हनुमानजी की चतुरता से रावण का यज्ञ विफल हुआ और उसका संहार सुनिश्चित हुआ। इस कथा के माध्यम से विजया दशमी केवल पुतला जलाने का उत्सव नहीं, बल्कि बुराई पर अच्छाई की विजय का प्रतीक बन जाती है।

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