Live Wire News literary portal with Gulmohar and Rajnigandha flowers

बेटियों का दर्द

बेटियाँ अपने मन का दर्द बार-बार चीख़ कर कहना चाहती रहीं। उनकी मासूम आँखों से गिरते आँसू और थरथराती आवाज़ें उनके भीतर छिपी पीड़ा का सबूत थीं। पर अफ़सोस, इस दुनिया ने उन चीख़ों को कभी सुनना ही नहीं चाहा। उनके शब्द हवा में गूँजते रहे, मगर कानों तक पहुँचने से पहले ही जैसे दीवारों से टकराकर बिखर जाते। समाज की बेरुख़ी इतनी गहरी थी कि मानो किसी को कोई ख़बर ही न हो कि बेटियाँ टूट रही हैं, बिखर रही हैं और भीतर ही भीतर मर रही हैं।

Read More