अपने छोटे बच्चे का हाथ थामे मुस्कुराते हुए एक पिता, जो सुरक्षा, प्रेम और विश्वास का प्रतीक है।

पापा

पिता सिर्फ़ एक रिश्ता नहीं, बल्कि वह साया हैं जो हर मुश्किल में अपने बच्चों के साथ खड़ा रहता है। पढ़िए पिता के प्रेम, त्याग और निस्वार्थ समर्पण को समर्पित यह मार्मिक कविता।

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पापा की खाली लकड़ी की कुर्सी, जिस पर उनकी यादें आज भी जीवित हैं – भावुक हिंदी संस्मरण

कुर्सी

घर के एक कोने में रखी वह पुरानी कुर्सी आज भी केवल लकड़ी का एक फर्नीचर नहीं लगती। वह पिता की आदतों, उनके अनुशासन, उनके स्नेह और पूरे परिवार की अनगिनत यादों की साक्षी है। इस मार्मिक संस्मरण में एक बेटी अपनी स्मृतियों के सहारे उस खाली कुर्सी में आज भी अपने पापा की मुस्कुराती हुई छवि देखती है। यह कहानी हर उस व्यक्ति के दिल को छू जाएगी, जिसने अपने पिता को खोया है या उनकी यादों को संजोए रखा है।

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