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गुलमोहर की घनी छाँव पिता की याद में भावुक हिंदी कविता

 गुलमोहर की घनी छाँव

यह कविता पिता की स्मृतियों और उनके वात्सल्य को समर्पित एक भावपूर्ण अभिव्यक्ति है। गुलमोहर की घनी छाँव और बचपन का घर कवयित्री के लिए पिता के स्नेह, सुरक्षा और अपनत्व का प्रतीक बन जाते हैं। पिता के दिए लाड़-दुलार, हर चिंता को समझने और कठिन समय में साथ देने की यादें आज भी उनके मन में जीवित हैं। पिता के जाने के बाद उनकी कमी और भी गहराई से महसूस होती है। कविता में बेटी अपने दिवंगत पिता को याद करते हुए उनके प्रति कृतज्ञता व्यक्त करती है और मन में एक बार फिर उनकी गोद में सिर रखने की भावुक इच्छा प्रकट करती है।

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अपने छोटे बच्चे का हाथ थामे मुस्कुराते हुए एक पिता, जो सुरक्षा, प्रेम और विश्वास का प्रतीक है।

पापा

पिता सिर्फ़ एक रिश्ता नहीं, बल्कि वह साया हैं जो हर मुश्किल में अपने बच्चों के साथ खड़ा रहता है। पढ़िए पिता के प्रेम, त्याग और निस्वार्थ समर्पण को समर्पित यह मार्मिक कविता।

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पापा की खाली लकड़ी की कुर्सी, जिस पर उनकी यादें आज भी जीवित हैं – भावुक हिंदी संस्मरण

कुर्सी

घर के एक कोने में रखी वह पुरानी कुर्सी आज भी केवल लकड़ी का एक फर्नीचर नहीं लगती। वह पिता की आदतों, उनके अनुशासन, उनके स्नेह और पूरे परिवार की अनगिनत यादों की साक्षी है। इस मार्मिक संस्मरण में एक बेटी अपनी स्मृतियों के सहारे उस खाली कुर्सी में आज भी अपने पापा की मुस्कुराती हुई छवि देखती है। यह कहानी हर उस व्यक्ति के दिल को छू जाएगी, जिसने अपने पिता को खोया है या उनकी यादों को संजोए रखा है।

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