रामलीला में एक अप्रत्याशित हादसा

यह घटना 1987 की है, जब मैं पीलीभीत के बीसलपुर में उपजिलाधिकारी था। दशहरे मेले में रावण के दरबार में स्थानीय नर्तकियाँ—पतुरिया—नृत्य करती थीं। उस वर्ष पुलिस उपाधीक्षक ने इस नृत्य पर रोक लगा दी। दशहरे के दिन, रावण बने कलाकार ने मुझसे पानी मांगा जिसे मैंने तुरंत दिया। लेकिन कुछ ही देर बाद वही कलाकार अचेत हो गया और चिकित्सालय पहुँचने पर मृत घोषित कर दिया गया। रावण वध उस वर्ष नहीं हो सका और मेला एक त्रासदी में समाप्त हुआ।यह एक याद दिलाती घटना है कि रावण का वध चाहे पुतले से हो या रामलीला में निभाए गए किरदार से, मृत्यु अपरिहार्य होती है।

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