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संगीत सूर्य केशवराव भोसले का 105वाँ स्मृति दिवस मनाया गया

मध्य प्रदेश की सांस्कृतिक परिषद द्वारा संगीत सूर्य केशवराव भोसले के 105वें स्मृति दिवस पर कार्यक्रम आयोजित किया गया। मुख्य अतिथि, लघु कथाकार और समीक्षक श्री संतोष सूपेकरजी ने छात्राओं को भोसले जी की अविस्मरणीय नाट्य परंपरा से परिचित कराते हुए युवा पीढ़ी को सांस्कृतिक क्षेत्र में योगदान देने के लिए प्रेरित किया। भोसले जी मराठी संगीत नाटक के सुप्रतिष्ठित कलाकार थे, जिन्होंने कम उम्र में नाट्य जगत में प्रवेश किया, नारी पात्रों की भूमिका निभाई और अनेक महत्वपूर्ण प्रयोगों से मराठी रंगभूमि के संगीत नाटक के सुवर्णकाल को पुनर्जीवित किया। उनके योगदान ने नाट्य, संगीत और सिनेमा में अमूल्य छाप छोड़ी। छात्राओं द्वारा प्रस्तुत रंगारंग कार्यक्रम और संस्था की प्रमुखों के उद्बोधन ने इस स्मृति दिवस को यादगार बनाया।

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भोर की प्रतीक्षा…

जाने कितने जंगलों को पार करती उसकी साँसें मेरे कानों से टकराई थीं। जैसे उसकी डूबती साँसें मुझे पुकार रही हों। मैं और मेरी साँसें उस निराकार ब्रह्मांड के शरणागत थे।एक कवियित्री की आँखों में खारे अश्क़ों की गहरी तरलता भरी थी। उन अश्क़ों ने मानो किसी देव के चरण पखारने की ठान ली थी। विशालकाय, हहराती गंगा में मेरे चंद खारे आँसू भी प्रार्थना में लीन थे।

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