ये हैं स्त्रियाँ!
स्त्री और पुरुष की दो विरोधी दुनियाओं के बीच शोषण, हिंसा और असमानता की कड़वी सच्चाई को उजागर करती यह कविता धार्मिक दंगों, पारिवारिक हिंसा, सामाजिक भेदभाव और स्त्री की देह पर होने वाले अत्याचारों पर तीखा सवाल उठाती है.

स्त्री और पुरुष की दो विरोधी दुनियाओं के बीच शोषण, हिंसा और असमानता की कड़वी सच्चाई को उजागर करती यह कविता धार्मिक दंगों, पारिवारिक हिंसा, सामाजिक भेदभाव और स्त्री की देह पर होने वाले अत्याचारों पर तीखा सवाल उठाती है.