Live Wire News literary portal with Gulmohar and Rajnigandha flowers

प्रेम में हो चले हैं हम दोनों थोड़े मूक और बधिर: अंजू सुंदर

लखनऊ से डॉ. अनुराधा पांडेय की रिपोर्ट लखनऊ– महिला काव्य मंच (मध्य) की लखनऊ इकाई की मासिक काव्य गोष्ठी का ऑनलाइन आयोजन किया गया।मुख्य अतिथि रहीं बिहार से लेखिका एवं संपादक प्रीति सिन्हा तथा विशिष्ट अतिथि रहीं उपाध्यक्ष प. रांची जि.इ./पू. सिंहभूम जि.इ. जमशेदपुर (संरक्षक) रिम्मी वर्मा। गोष्ठी का आरम्भ डॉ. राजेश कुमारी, राष्ट्रीय अध्यक्ष,…

Read More

दुर्गा.. 

दया और माया दो बहनें थीं। दया माँ दुर्गा की परमभक्त थी और अपने घर का पूरा काम संभालती थी, जबकि माया और उसका पति माधो आरामतलब और चालाक थे। दया और उधो की शादी हुई और उनके घर में छः बेटियाँ थीं।
नवरात्र के दिन, दया और उधो की साधारण साधना और भक्ति के बीच, उधो ने रास्ते में एक नवजात बच्ची को पाया, जिसे दया ने अपने घर ले जाकर गोद में लिया। दया ने उसे ‘दुर्गा’ नाम दिया और बिना सामग्री के ही पूजा-अर्चना की।
कुछ दिनों में घर की हालत सुधर गई और महानवमी की रात, बच्ची अपने वास्तविक रूप में प्रकट हुई। देवी दुर्गा ने माधो को उसकी क्रूरता का पाठ पढ़ाया और दया के घर को आशीर्वाद देकर पुनः खुशहाली दी।कहानी यह संदेश देती है कि **सच्ची भक्ति, मानवता और दया ही परम बल हैं**, और कन्याओं का सम्मान करना जरूरी है।

Read More