नीले आकाश, हरे-भरे जंगलों, पर्वतों, नदी और झरनों से सजा प्राकृतिक दृश्य, जहाँ एक व्यक्ति पौधा लगा रहा है। आसपास पक्षी और वन्यजीव दिखाई दे रहे हैं, जो पर्यावरण संरक्षण, जैव विविधता और धरती माता की सुंदरता का संदेश दे रहे हैं।

नीला अम्बर, स्वच्छ पवन

“नीला अम्बर, स्वच्छ पवन है” कविता प्रकृति की सुंदरता, जैव विविधता और धरती माता के प्रति मानव के कर्तव्यों को दर्शाती है। यह रचना पर्यावरण संरक्षण, वृक्षारोपण और प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण का सशक्त संदेश देती है।

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नव अंकुर की आस

नवपल्लवित पौधा अपनी कोमल जड़ों से धरती का आशीर्वाद लेकर जीवन की नई शुरुआत करता है। वह नव अंबर और नव भोर के साक्षी के रूप में जन्म लेता है, अपने भीतर जीवन की नयी आस संजोए हुए। चारों ओर फैले उपवन की मधुर सुवास उसे उल्लास से भर देती है। वह अभी शिशु है, पर हर दिन वायु और जल का स्पर्श पाकर बढ़ने की आकांक्षा रखता है।

वह जानता है कि एक दिन वह विशाल वृक्ष बनेगा—जिसकी छाया में संसार विश्राम करेगा, जो अनगिनत जीवों को ऑक्सीजन और जीवनदान देगा। उसका अस्तित्व निःस्वार्थ है, उसका हर अंश किसी न किसी के काम आने वाला है

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