ना झुकती, ना रुकती — मैं नारी हूं

मैं नारी हूं। गलतियां करती हूं, पर उन्हें दोहराती नहीं। गलती से सबक लेकर आगे बढ़ना जानती हूं। सीमाओं में रहकर भी सफलता को गले लगाना चाहती हूं। अपनी लक्ष्मण रेखा स्वयं तय करती हूं, जिसे कोई लांघकर अंदर नहीं आ सकता और कोई बहरूपिया मुझे रेखा पार ले जा नहीं सकता। मैं उन्नति के शिखर को छूना चाहती हूं, पर अपने दायरों में रहकर। किसी को कुचलकर आगे बढ़ना या किसी समझौते के कारण झुकना नहीं चाहती। सफलता न मिले तो भी मंज़ूर है, लेकिन अपने किरदार को गिराना नहीं चाहती। अगर मेरे परिवार को बुरी नज़रें छू जाएं, तो काली दुर्गा बनने में मुझे देर नहीं लगती। ज़रूरत पड़े तो कंधे से कंधा मिलाने में कभी नहीं कतराती। मुझे बराबरी का दर्जा मिले या न मिले, पर मेरी शान इससे कभी घटती नहीं।

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