वाराणसी के दशाश्वमेध घाट पर उगते सूरज, माँ गंगा की आरती, बाबा विश्वनाथ मंदिर और आध्यात्मिक वातावरण को दर्शाती भावपूर्ण हिंदी कविता का प्रतीकात्मक दृश्य।

प्रिय, आना कभी काशी तुम

“प्रिय, आना कभी काशी तुम” प्रेम, भक्ति और अध्यात्म का अद्भुत संगम है। यह रचना पाठक को सुबहे बनारस, बाबा विश्वनाथ, माँ गंगा, अन्नपूर्णा, दशाश्वमेध घाट, मणिकर्णिका और सारनाथ की आध्यात्मिक यात्रा पर ले जाती है, जहाँ प्रेम शिवत्व में विलीन हो जाता है।

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