गुरु की शरण सौभाग्य का द्वार – पं. राजरक्षितविजयजी

श्री संभवनाथ जिनालय, पुणे में आयोजित गुरु पूर्णिमा प्रवचन में पं. राजरक्षितविजयजी ने कहा – “संपत्ति भाग्य से मिलती है, लेकिन सद्गुरु सौभाग्य से मिलते हैं।” उन्होंने गुरु की सेवा को भगवान की सेवा से भी श्रेष्ठ बताया और जीवन में सद्गुरु के मार्गदर्शन की अनिवार्यता पर बल दिया।

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