‘मेरा अनुरागी मन’
‘मेरा अनुरागी मन’ आत्मप्रेम, अनुराग और जीवन में प्रेम के पुनर्जागरण की एक संवेदनशील कविता है। इसमें वैराग्य से श्रृंगार तक की भावयात्रा, बसंत की तरह लौटती मुस्कान और भीतर बसे दिव्य प्रेम का सुंदर चित्रण किया गया है।

‘मेरा अनुरागी मन’ आत्मप्रेम, अनुराग और जीवन में प्रेम के पुनर्जागरण की एक संवेदनशील कविता है। इसमें वैराग्य से श्रृंगार तक की भावयात्रा, बसंत की तरह लौटती मुस्कान और भीतर बसे दिव्य प्रेम का सुंदर चित्रण किया गया है।