महाभारत सभा में द्रौपदी श्रीकृष्ण को पुकारती हुई, दुशासन चीरहरण का प्रयास करता है, दिव्य प्रकाश से अनंत वस्त्र प्रकट होते हैं और सभा मौन खड़ी है।

हे गोविंद! मेरी लाज बचाओ

द्रौपदी के चीरहरण प्रसंग पर आधारित यह मार्मिक कविता नारी सम्मान, अन्याय के विरुद्ध पुकार और श्रीकृष्ण की दिव्य रक्षा का भावपूर्ण चित्रण करती है।

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