समय बदला पर मेरी यादों का मेला नहीं
गोगापुर का मेला मेरे लिए केवल एक आयोजन नहीं, बल्कि बचपन की वह दुनिया है जहाँ उत्साह, जिज्ञासा और अपनापन एक साथ साँस लेते थे। बैलगाड़ी में बैठकर मेले की ओर जाना, दाल-बाटी की खुशबू में भूख से ज़्यादा आनंद महसूस करना और ज़मीन पर बैठकर टूरिंग टॉकीज़ में फ़िल्म देखना ये सब मेरी स्मृतियों का हिस्सा बन गए। आज मेला भले ही बदल गया हो, पर मेरे भीतर वह अब भी वैसे ही जीवित है, जैसे समय ने उसे छुआ ही न हो।
