…गर तुम साथ हो
वाणी को गए दो साल हो चुके थे, लेकिन सारंग उसे भूल नहीं पाया था। फिर एक दिन उसे 52 लिफाफों वाला एक डिब्बा मिला, जिसे वाणी उसके लिए छोड़ गई थी। हर रविवार खुलने वाला एक लिफाफा उसे धीरे-धीरे फिर से जीना सिखाने लगा।

वाणी को गए दो साल हो चुके थे, लेकिन सारंग उसे भूल नहीं पाया था। फिर एक दिन उसे 52 लिफाफों वाला एक डिब्बा मिला, जिसे वाणी उसके लिए छोड़ गई थी। हर रविवार खुलने वाला एक लिफाफा उसे धीरे-धीरे फिर से जीना सिखाने लगा।