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ख़ामोश घर की दीवारें फुसफुसाती हैं भाग 5 में श्यामबाबू और आगंतुक की भावनात्मक मुलाकात।

ख़ामोश घर की दीवारें फुसफुसाती हैं…

एक जन्मदिन, पुरानी यादें और दरवाज़े पर खड़ा एक अनजान आगंतुक। क्या श्यामबाबू अपने सामने खड़े व्यक्ति को सचमुच नहीं पहचान पाए या उनके दिल में कोई गहरी नाराज़गी है? पढ़िए भावनाओं और रिश्तों से जुड़ी कहानी का पाँचवाँ भाग।

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