दोस्त को सलाम
“दोस्त को सलाम” बचपन से शुरू हुई 35 वर्ष पुरानी दोस्ती की भावनात्मक यात्रा है। स्कूल की शरारतों, बिछड़ने, वर्षों बाद फिर मिलने और रिश्तों की अटूट गरमाहट को सहेजता यह संस्मरण बताता है कि सच्ची दोस्ती समय और दूरी से कभी कम नहीं होती।

“दोस्त को सलाम” बचपन से शुरू हुई 35 वर्ष पुरानी दोस्ती की भावनात्मक यात्रा है। स्कूल की शरारतों, बिछड़ने, वर्षों बाद फिर मिलने और रिश्तों की अटूट गरमाहट को सहेजता यह संस्मरण बताता है कि सच्ची दोस्ती समय और दूरी से कभी कम नहीं होती।