बंधन रक्षा का
रक्षा की डोर केवल एक धागा नहीं, बल्कि विश्वास और वचन का बंधन है। ‘बंधन रक्षा का’ कविता कृष्ण और द्रौपदी के रिश्ते के माध्यम से इसी अटूट विश्वास और रक्षा के वचन को अभिव्यक्त करती है।

रक्षा की डोर केवल एक धागा नहीं, बल्कि विश्वास और वचन का बंधन है। ‘बंधन रक्षा का’ कविता कृष्ण और द्रौपदी के रिश्ते के माध्यम से इसी अटूट विश्वास और रक्षा के वचन को अभिव्यक्त करती है।