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शालिनी वर्मा के काव्य संग्रह ‘धीरे-धीरे उजाला’ के लोकार्पण समारोह का दृश्य

शालिनी वर्मा के ‘धीरे-धीरे उजाला’ का लोकार्पण

दोहा में पिछले 24 वर्षों से हिंदी और भारतीय संस्कृति के प्रचार-प्रसार में सक्रिय शालिनी वर्मा के काव्य संग्रह ‘धीरे-धीरे उजाला’ का नई दिल्ली में लोकार्पण हुआ. संग्रह प्रवासी जीवन की स्मृतियों, संवेदनाओं और उम्मीदों को काव्यात्मक अभिव्यक्ति देता है.

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सपनों की कोई सरहद नहीं…

बिहार के छोटे से शहर से निकलकर देश-विदेश में अपनी साहित्यिक, सामाजिक और सांस्कृतिक उपलब्धियों से पहचान बनाने वाली रंजीता सिंह फ़लक आज महिलाओं के लिए प्रेरणा का प्रतीक बन चुकी हैं। स्वयंसिद्धा संस्था के माध्यम से वह महिलाओं को सशक्त बनाने का कार्य कर रही हैं, वहीं कविकुंभ पत्रिका और अपने चर्चित काव्य संग्रहों के जरिए साहित्य जगत में भी अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज कर चुकी हैं।

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