शान-ए-कानपुर और कानपुर रत्न सम्मान समारोह

कानपुर के हरिहरनाथ शास्त्री भवन में शहीद-ए-आज़म सरदार भगत सिंह के 118वें जन्मोत्सव के अवसर पर एक भव्य समारोह आयोजित किया गया। इस अवसर पर शान-ए-कानपुर सम्मान और कानपुर रत्न सम्मान प्रदान किए गए। मुख्य अतिथि श्री किरणजीत सिंह सरदार (भगत सिंह के भतीजे) ने शहीद भगत सिंह के अद्वितीय बलिदान और क्रांतिकारी विचारों को उजागर किया और युवा पीढ़ी को उनके आदर्शों से प्रेरणा लेकर राष्ट्र निर्माण में योगदान देने की प्रेरणा दी। कार्यक्रम में समाज के विभिन्न क्षेत्रों — साहित्य, कला, शिक्षा, मनोरंजन, चिकित्सा, खेल, समाज सेवा — के लोगों को सम्मानित किया गया। उपस्थित जनों ने शहीदों के सपनों के भारत निर्माण में सक्रिय भूमिका निभाने का संकल्प लिया। गोल्डन क्लब ने रक्तदान, अंगदान और देहदान जैसे सामाजिक मुद्दों के प्रति जागरूकता बढ़ाने की मुहिम जारी रखने की घोषणा की।

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ये मूर्तिकार

यह मूर्तिकार, जो छेनी-हथौड़ी से पत्थरों को तराशते-तराशते खुद भी एक पाषाण शिला सा बन गया है। उसके भीतर का प्रेम कहीं उसकी बनाई मूर्तियों में समा गया, या कहें कि बुत बनकर रह गया। कल जो प्रेम से लबालब था, आज वह भीतर से सूख चुका है—दरकती पपड़ी जैसा। समय की नश्वरता को समझते हुए भी उसने उसे नज़रअंदाज़ किया, क्योंकि उसके जीवन में अब बस औज़ारों का ही महत्व रह गया है। यही औज़ार उसके जीवनयापन का साधन हैं, उसकी भूख मिटाने का माध्यम हैं—उसका एकमात्र साथ।

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