शिव

यह कविता शिव महिमा का अनुपम वर्णन है, जिसमें सदाशिव की अनंत महिमा, करुणा, दया और प्रेम का भावपूर्ण चित्रण किया गया है। शिव केवल तीनों लोकों के स्वामी ही नहीं बल्कि भक्तों के उद्धारक भी हैं। डमरू की ध्वनि से गुंजित, दूध और जल की धार से पूजित, सदाशिव का प्रत्येक रूप श्रद्धा से भरा हुआ है। शिव शंभू न केवल काशी के वासी हैं बल्कि हर कण में विद्यमान हैं। उनका भस्म रमाया रूप, सर्पों का हार, नंदी पर विराजमान स्वरूप—सभी जीवन के हर क्षण में शांति और शक्ति का संचार करते हैं।

Read More