इश्क़ का सुकून
यह ग़ज़ल मुहब्बत के नाज़ुक और खूबसूरत एहसासों को बेहद सलीके से प्रस्तुत करती है। इसमें प्रिय के रूप, उसकी अदाओं और उसके प्रभाव को प्रकृति के बिंबों के माध्यम से उकेरा गया है—जहाँ नज़ारे शरमा जाते हैं, फूल मदहोश हो जाते हैं और हवाएँ भी बेखुद हो उठती हैं। शायर के लिए प्रेम केवल भावना नहीं, बल्कि एक ऐसा आध्यात्मिक अनुभव है जो जीवन के सफर को उजालों और सुकून से भर देता है।
