Live Wire News literary portal with Gulmohar and Rajnigandha flowers
अंधेरे कमरे में खिड़की के पास बैठी एक उदास महिला, आँखों में आँसू और चेहरे पर दर्द की गहरी अभिव्यक्ति, बाहर बारिश का दृश्य

करुणा बन गई कमजोरी

यह कविता गहरे भावनात्मक घावों और टूटे हुए विश्वास की कहानी कहती है। इसमें एक ऐसे मन की पीड़ा झलकती है जिसने बार-बार ठोकरें खाकर यह सीखा कि अंधी करुणा और बिना सोचे समझे अपनापन देना स्वयं के लिए विनाशकारी हो सकता है। जीवन के कठोर अनुभवों ने उसे भीतर से मजबूत तो बनाया, लेकिन साथ ही उसके जज़्बातों पर एक स्थायी परत भी चढ़ा दी, जहाँ अब संवेदनाएँ नियंत्रित हैं और विश्वास सीमित।

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