Live Wire News literary portal with Gulmohar and Rajnigandha flowers

पोटली खुली नहीं, हृदय खुल गया

कथा विश्राम का वह क्षण केवल समापन नहीं था, वह कृष्ण–सुदामा की मित्रता का सजीव दर्शन बन गया। राजमहल के वैभव में अपने बालसखा को गले लगाते श्रीकृष्ण और काँपते हाथों में पोटली थामे सुदामा इस प्रसंग ने श्रद्धालुओं के हृदय पिघला दिए। बिना माँगे सब कुछ पा लेने वाली सुदामा की भक्ति और निष्काम मित्रता ने पंडाल में बैठे हर व्यक्ति की आँखें नम कर दीं।

Read More