कब आओगे तुम ?
यह रचना उस मन की आवाज़ है जो केवल साथ नहीं, बल्कि ऐसा प्रेम चाहता है जो खामोशियों को भी समझ सके और बिखरी हुई रूह को अपना घर दे सके।

यह रचना उस मन की आवाज़ है जो केवल साथ नहीं, बल्कि ऐसा प्रेम चाहता है जो खामोशियों को भी समझ सके और बिखरी हुई रूह को अपना घर दे सके।