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सरकारी नौकरी मांगते मदन के सामने बैठे नेता जी, राजनीतिक व्यंग्य लघुकथा ‘डिग्री’ का दृश्य

अगर मुड़ के देखे, जो तू मुझको एक बार…

कभी कोई लौटकर सिर्फ एक बार मुड़कर देख ले, तो बरसों की रंजिशें मिट सकती हैं। यह कविता प्रेम, इंतज़ार, विरह और बीते पलों की उन यादों को स्वर देती है, जो आज भी दिल में जीवित हैं।

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चाँदनी रात और मंद समीर के बीच प्रेम और यादों में खोए दो लोगों का भावनात्मक दृश्य।

मनवा खाए हिचकोले

मनवा खाए हिचकोले” एक ऐसी प्रेम कविता है जिसमें समीर, यादों की खुशबू, चाँदनी और धड़कनों के माध्यम से प्रेम की कोमल अनुभूतियों को अभिव्यक्ति मिली है।

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अपने बचपन के प्रेम और पुरानी यादों में खोई एक युवती, धूप भरे माहौल में पुराने घर की ओर भावुक नज़रों से देखते हुए।

सब कुछ याद है मुझे

विजया डालमिया, हैदराबाद वो हमारा दीवानापन थाया बचपन की मोहब्बत,जिसे दोस्ती का नाम देकरकरते थे हर पल शरारत। बड़े होने पर भीसब कुछ याद है मुझे…. छोटी-छोटी ज़िद, छोटी-छोटी तकरार,देती थी लंबी-सी खुशी।वो तपती धूप मेंएकटक उसके घर की ओर ताकते रहना,उसकी एक झलक पाने के लिए। पैरों में पड़े फफोलों को देखकरउसका मुझे डाँटना,और…

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बसंत के मौसम में खिले फूलों और हरियाली के बीच खड़ी एक मुस्कुराती महिला

मौसम-ए-बहार

“मौसम-ए-बहार” एक खूबसूरत हिंदी कविता है, जो बसंत ऋतु की ताजगी, प्रकृति की रंगीन छटा और मन की गहरी भावनाओं को बेहद कोमलता से व्यक्त करती है। इस कविता में बाग-बगीचों की हरियाली, खिलते फूल, और हल्की-हल्की हवाओं का स्पर्श एक जीवंत दृश्य रचते हैं, जो पाठक को सीधे प्रकृति की गोद में ले जाता है।

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बस स्टॉप पर खड़ी एक युवती, आँखों में इंतज़ार और होठों पर हल्की मुस्कान, प्रेम और विरह की भावुक हिंदी कविता का दृश्य।

कुछ पलों की कहानी

यह रचना प्रेम, स्मृति और इंतज़ार की मार्मिक कथा है। प्यार में पागल एक लड़की, जो समय के साथ आगे बढ़ गई है, लेकिन वादों की स्मृतियाँ आज भी बस स्टॉप पर खड़ी मिलती हैं। शीशा, काजल, मुस्कान और हर आती बस सब मिलकर अधूरे प्रेम और लौटकर न आने वाले वादे की एक संवेदनशील कविता रचते हैं।

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