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सितारों से सजी है जो…

सितारों से सजी लाल चुनरी और स्वर्ण आभूषणों से अलंकृत माँ भवानी की प्रतिमा। माँ भवानी के दिव्य शृंगार और महिमा को समर्पित भक्तिमय कविता।

नवनीत कमल, जगदलपुर

भवानी मातु द्वारे है,सुनो त्यौहार है माँ का।
गले में हार फूलों का,गजब श्रृंगार है माँ का।

सितारों से सजी चूनर,खड़ी नव रूप है धारे,
कृपा बरसा रही देखो,यही उपकार है माँ का।

महा गौरी कहे कोई,कहे कोई भवानी है,
दिखें हैं भक्त कर जोड़े,वहाँ दरबार है माँ का।

जलेंगे जोत मंदिर में,करें हम आरती मन से,
बनेंगे काम सब बिगड़े,करें सत्कार हम माँ का।

बताओ कामना अपनी,भरेंगी झोलियाँ सबकी,
हमेशा ही भरा रहता, हृदय भंडार है माँ का।

अलौकिक रूप जो देखा,वही महिमा सुनाता है।
निराशा छोड़ कर बोलो,सदा जयकार है माँ का ।

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