घाट से सिर्फ 1–2 किमी दूरी पर 7 लाख वाहनों के लिए 3-लेवल व्यवस्था

सुरेश परिहार, संपादक, लाइव वॉयर न्यूज, पुणे
उज्जैन। सिंहस्थ 2028 की उल्टी गिनती शुरू होते ही प्रशासन ने भीड़ प्रबंधन का सबसे बड़ा फोकस सुगम पार्किंग और तेज़ आवाजाही पर काम तेज कर दिया है। सिंहस्थ मेला कार्यालय में गुरुवार को तीन घंटे चली हाई-लेवल बैठक में तय हुआ कि श्रद्धालुओं को ज्यादा पैदल न चलना पड़े, इसके लिए नदी घाट से 1–2 किलोमीटर की परिधि में ही पार्किंग विकसित की जाएगी। लक्ष्य है कि स्नान के बाद लोग बिना जाम में फंसे शीघ्र अपने गंतव्य की ओर लौट सकें।
3-लेवल पार्किंग मॉडल: ‘पार्क–प्रे–प्रोसीड’ रणनीति
संभाग आयुक्त Aashish Singh ने बताया कि मुख्यमंत्री Mohan Yadav के निर्देशों के बाद माइक्रो प्लानिंग शुरू हो चुकी है। प्रस्तावित ढांचे के अनुसार लेवल-1: 1 लाख वाहन लेवल-2: 2–3 लाख वाहन लेवल-3: 3–4 लाख वाहन कुल मिलाकर 5 से 7 लाख वाहनों के लिए 12 से अधिक स्थलों पर व्यवस्था की तैयारी है। फोर-लेन/सिक्स-लेन और बायपास से जुड़े मार्गों के पास पार्किंग विकसित की जाएगी, ताकि शहर के भीतर दबाव कम रहे।
भीड़ का विज्ञान: 2 किमी रेडियस में ‘वॉक-फ्रेंडली’ ज़ोन
प्लान का केंद्रीय बिंदु है घाट से अधिकतम 2 किमी दूरी। जहां संभव हो, 1–2 किमी की रेंज में पार्किंग रखी जाएगी, ताकि वरिष्ठ नागरिकों, महिलाओं और बच्चों को लंबी पैदल दूरी न तय करनी पड़े। पार्किंग क्षेत्रों में शौचालय, पेयजल, प्राथमिक उपचार और सूचना केंद्र जैसी सुविधाएं भी उपलब्ध कराने की रूपरेखा है।
रूट रीडिज़ाइन: अंडरपास और वैकल्पिक मार्ग
बैठक में एडीजी Rakesh Gupta ने पिछले सिंहस्थ के अनुभवों के आधार पर सुझाव दिए।
- ट्रैफिक सुचारू रखने के लिए अंडरपास निर्माण के निर्देश।
- वैकल्पिक मार्गों से देवास–इंदौर, बड़नगर–बदनावर, गरोठ–आगर–मक्सी दिशा की आवाजाही को डायवर्ट करने की तैयारी।
- पार्किंग से घाट तक ‘फास्ट-मूव’ कॉरिडोर, ताकि स्नान के बाद निकासी तेज रहे।