
गायत्री बंका, प्रसिद्ध लेखिका, मुंबई
काश तुम आते तो अच्छा होता,
इंतज़ार न कराते तो अच्छा होता.
इंतज़ार का फल मीठा होता है,
मगर तुम भी चखते तो अच्छा होता.
मुहब्बत जताकर भूल बैठे हो,
यूँ न तड़पाते तो अच्छा होता.
कहकर गए थे मरते हैं तुम पर,
गैरों की बाहों में न जाते तो अच्छा होता.
क्या बात गायत्री जी । आप भी कुछ वक्त हमारे साथ बिताते तो अच्छा होता ।
जी जरूर मिलते है मधु जी 🙏🏼