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कलयुगी परिणय सूत्र

कलयुग में टूटते विवाह और रिश्तों को दर्शाती प्रतीकात्मक छवि

डॉ.रश्मि पटेल, प्रसिद्ध लेखिका, मुंबई

पति-पत्नी का रिश्ता था,
एक हिस्सा तेरा, एक हिस्सा मेरा था।

तू अपना हिस्सा भूल गई, किसी और के साथ डोल गई,
एक छोटा-सा ही तो झगड़ा था,
तिल का ताड़ तूने बनाया था।
माँ-बाप को बुलाया,
पुलिस-थाना करवाया था।
एक हिस्सा तेरा, एक हिस्सा मेरा था।

कुटिल कैकयी-सा दिमाग़ चलाया था,
अयोध्या जैसे घर को
हस्तिनापुर बनाया था।
एक हिस्सा तेरा, एक हिस्सा मेरा था।

शकुनि-सा पासा तूने डाला था,
परिवार हमारा हार गया था।
विश्वास की पीठ पर
खंजर तूने उतारा था।
एक हिस्सा तेरा, एक हिस्सा मेरा था।

शादी का बंधन नहीं,
तुझे इश्क़ का फ़र्ज़ निभाना था,
अपनी औलादों के बचपने को
वासनाओं पर चढ़ाना था।
एक हिस्सा तेरा, एक हिस्सा मेरा था।

गलती तेरी नहीं, हमारी थी,
तेरी इच्छाओं की सूची बड़ी भारी थी।
क्या कहें—
सतयुग की माँ पर
कलयुग की नारी भारी थी।
एक हिस्सा तेरा, एक हिस्सा मेरा था।

हल्दी की छाप नहीं,
तूने कुल में दाग़ लगाई थी।
सात जन्मों का साथ तो दूर,
सात साल भी न निभाई थी।
एक हिस्सा तेरा, एक हिस्सा मेरा था।

“डोली में आई हूँ, अर्थी पर जाऊँगी”
डायलॉग बन गया आज का।
पति राजा रघुवंशी बना,
और सौरभ बन गया
(जिन पत्नियों ने क़त्ल किया था)।
एक हिस्सा तेरा, एक हिस्सा मेरा था।

प्यार की आड़ में
अय्याशियों का खेल खेला जाता है।
परिणय-सूत्र तो
सती-सावित्री का गहना है।
मेरी तो सीता को हरणे वाला भी
उसके मन का रावण है।
एक हिस्सा तेरा, एक हिस्सा मेरा था।

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