
सुनीता तिवारी, कानपुर
विद्यालय के बाहर आतीं
चूरन वाली चाची जी,
छोटी-सी दुकान लगातीं
चूरन वाली चाची जी।
झरबेरी के बेर रसीले—
हरे, कत्थई, लाल और पीले,
उन पर काला नमक लगातीं
चूरन वाली चाची जी।
लाल-लाल इमली गुड़ वाली,
ऊपर चाँदी वर्क सजा ली,
हरे-हरे दोने में देतीं
चूरन वाली चाची जी।
कम्पट स्वाद संतरे वाला,
बिस्कुट मस्त पारले वाला,
कमरख नमक लगा कर देतीं
चूरन वाली चाची जी।
स्वाद–शुद्धता की गारंटी,
कोई न उनको कहता आंटी,
दिल की एकदम भोली-भाली
चूरन वाली चाची जी।
वाह
Bachpan wali yaadein taza ho uthi