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पानी की अपनी मर्जी है साहब…

मेघा अग्रवाल, प्रसिद्ध लेखिका, नागपुर (महाराष्ट्र)

पानी अगर जमा हो तो
ठंड से मार देता है।

पानी अगर तपा हो तो
जला कर मार देता है।

पानी अगर ज्यादा हो तो
डुबो कर मार देता है।

पानी अगर ना हो तो
प्यास से मार देता है।

पानी अगर सैलाब मे हो तो
बाढ़ से तबाह कर देता है।

पानी अगर चुल्लू भर हो तो
शर्म से मार देता है।

पानी अगर मैला हो तो
बीमारी से मार देता है।

पानी अगर आंख मे हो तो
आँसू बन बहता है।

पानी अगर शरीर से बहे तो
परिश्रम कहलाता है।

पानी अगर गंगा जल हो तो
पापों से तार, मोक्ष देता है।

One thought on “पानी की अपनी मर्जी है साहब…

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